प्रश्नोत्तर P21-0022 · भाग 21
जब तक स्व नहीं मिलता, जरूरत में किया कर्म भी कर्म ही है, और स्व में गति है तो जहां दृष्टि डालेगा वहां कर्ता पद आ जाएगा — क्या कर्ता भाव बंद हो सकता है?
तो स्व को पहले पा लो, फिर कर्म करो। जब तक स्व में नहीं आया, तब तक कर्ता भाव बंद नहीं हो सकता; स्व को खोज लिया तो उसके बाद कुछ नहीं आने वाला, बाद में तो आनंद ही आनंद है। तो बस उसी को खोज लो — जब यह पक्का हो गया, तो अब समय क्यों बर्बाद करना? कुछ न करने में आ जाओ, बात खत्म।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07