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प्रश्नोत्तर P21-0002 · भाग 21

जब हम सो जाते हैं तो कोई इच्छा-अपेक्षा नहीं बचती — तब तो हम स्व में ही होते हैं?

वह प्रकृति की एक व्यवस्था है, शरीर को आराम देना; हम तो जागने की बात करते हैं, सोने के बाद की बात हम भी नहीं करते। और सोने की इच्छा? कभी-कभी नींद आती है, आप घंटों रोक लेते हो — नींद शरीर की जरूरत है, इच्छा नहीं। इच्छा तब बोलेंगे जब शरीर नहीं चाहे फिर भी सोते ही रहे — जरूरत से ज्यादा सोओगे तो वही तकलीफ देने लगेगा, राग-द्वेष होगा। बस जरूरत में जीना चालू कर दो और योग्यता से ज्यादा पाने का त्याग करो — आगे बंधन बंधेगा ही नहीं, बात तुरंत खत्म।

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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07