प्रश्नोत्तर P20-0190 · भाग 20
अगर ऐसे ही चलता रहा तो यह चक्र छूट ही नहीं सकता — स्व को पहचानेगा कौन, और छोड़ने के बाद वह फिर पकड़ नहीं लेगा?
जब तक स्व को पहचानता नहीं, तब तक उसकी इच्छा संपूर्ण होगी नहीं। कौन पहचानेगा? खुद पहचानेगा — लेकिन बाहर झांकने से स्व नहीं मिलेगा। स्व में आ जाएगा तो बाद में वह नहीं पकड़ सकता; और स्व में तब आएगा जब इच्छा-अपेक्षा से मुक्त होगा, उसके पहले आ ही नहीं सकता। तो अपनी इच्छा-अपेक्षा से छुड़ा लो। ध्यान रखना, बंधन एक से नहीं होता, दो से होता है — इच्छा, और बदले में रिटर्न की अपेक्षा; दो रस्सी से गांठ लगती है, एक से नहीं।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07