प्रश्नोत्तर P20-0188 · भाग 20
इच्छा की परिभाषा क्या है — स्व से हम हटे कैसे?
ध्यान से सुनो — यहां इच्छा नहीं है, यहां जरूरत है। हम जरूरत में इस पिंड में आए, पहले जरूरत में मांग की, उसमें न राग था न द्वेष। जब जरूरत को अपने तरीके से पाने की कोशिश की, तब मैं फंस गया — जब योग्यता से ज्यादा चाहिए, सामने वाले ने दे दिया तो राग में फंसा, नहीं दिया तो द्वेष में। यही है इच्छा। भिन्न कैसे हुआ? ज्यादा पाने के चक्कर में — इस पॉइंट को जीवन में नोट कर लेना। जब तक वह जरूरत में जिया, राग-द्वेष में नहीं फंसा, अपने आप में ही था। बंधन राग-द्वेष का है, और राग-द्वेष तब पैदा होता है जब योग्यता से ज्यादा मिलता है या नहीं मिलता। तो योग्यता से ज्यादा पाने की उम्मीद का त्याग कर दो — आगे बंधन नहीं बंधेगा, और पिछला जितना किया है, उससे ईमानदारी-सत्कर्म से जीवन जिओगे तो निकल जाओगे। यह सीधा है।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07