प्रश्नोत्तर P20-0183 · भाग 20
एक ही घर में वही भोजन किसी को बहुत अच्छा, किसी को तीखा या खराब क्यों लगता है?
स्वाद लोगों का अपना-अपना है — उसी वस्तु से किसी को स्वाद मिलता है, किसी को नहीं; एक कहता है मसाला कम, एक कहता है ज्यादा। शरीर पांच तत्व से बना, भोजन भी एक, तो एक जैसा लगना चाहिए — फिर अलग क्यों? जिसने अपनी वासना से जो गुण की दृष्टि डाली है, उसी में फंस गया है — तो इसी से अपने आप को निकाल लो: न अच्छे में जाओ, न बुरे में; जो भी ग्रहण कर रहे हो करो, पर राग-द्वेष में मत जाओ। भोजन शरीर के पोषण के लिए करो, स्वाद स्वाभाविक आ रहा है तो आने दो; उसे बदलना भी अप्राकृतिक है — मिर्ची को तीखा नहीं मीठा बनाना चाहते हो तो यह भी एक लड़ाई है। सहज, शरीर के लिए उपयोगी, उचित तरीके से, बिना किसी को तकलीफ दिए, ठीक में उपयोग करो — अच्छे में गए तो भी फंसोगे, बुरे में गए तो भी।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07