आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P20-0175 · भाग 20

हम परेशान क्यों हैं — क्या हम कहीं खो गए हैं?

खोए कहां हो? खोया होता तो मंदबुद्धि होता, पागल होता या बोध होता — तीन में से एक। हमें अपनी स्थिति का पता है, लेकिन वह स्थिति सत है या असत, यह नहीं पता, क्योंकि सत ने सत-असत को, सच-झूठ को पकड़ लिया है। स्वरूप तो सत्य है, वह असत हो ही नहीं सकता — लेकिन छोड़ोगे तब ना। पकड़ा क्या है? रूप, जो परिवर्तनशील है; उसमें सुख ढूंढ लिया, उसमें हो गए — कभी सच में, कभी झूठ में, इसी में जी रहे हो। जो मेरा स्वरूप है, वह सच और झूठ के परे है, वह बना हुआ नहीं है — स्व; वहां रूप खत्म हो जाता है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07