प्रश्नोत्तर P20-0154 · भाग 20
गुरु जी, हंसने, रोने, गुस्से में हॉर्मोन रिलीज होते हैं — ध्यान में बिना कुछ किए जो गहरा नशा-सा, सिर्फ "हूं" का एहसास होता है, क्या वह भी हॉर्मोन या माइंड का गेम है?
माइंड का तो कोई गेम ही नहीं है। माइंड आदान-प्रदान के लिए है, जो अच्छे-बुरे को महसूस कर सके; महसूस करने वाले आप हो, माइंड तो निमित्त बनता है। एक बिंदु के बाद जो पता नहीं चलता, उसमें आप होते हो और उसमें कुछ भी नहीं होता, तो पता क्या चले? वहां कुछ दिखता भी नहीं, बस एहसास कर सकते हो, क्योंकि पांच इंद्रियों से परे उठ गए — एहसास जिससे हो रहा है और एहसास करने वाला भी वही है।
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