आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0165 · भाग 19

गुरु जी, आपको इतनी मेहनत और पीड़ा के बाद ज्ञान मिला और हमें सहज में मिल रहा है — क्या आपके कर्म हमसे बुरे थे?

नहीं। आपको अकेले के लिए मिल रहा है, और एक व्यक्ति ने अनेकों के लिए पाया — बहुत फर्क है। साधक के दो भाव होते हैं: या तो अपना कल्याण, या जगत कल्याण। एक आदमी के भोजन के लिए कमाना हो और लाखों-करोड़ों के लिए कमाना हो, तो ज्यादा पीड़ा किसे झेलनी पड़ेगी? जो लाखों के लिए कमाए। शुरुआती भाव से ही वह पीड़ा आती है।

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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26