प्रश्नोत्तर P19-0155 · भाग 19
गुरु जी, साधना में आनंद या मूल कैसा होगा, क्या यह सोचना चाहिए?
नहीं। सीधी सी बात, यही साधना है — इच्छा और अपेक्षा से अपने आप को मुक्त कराओ। कुछ बनने की, कुछ पाने की इच्छा मत रखो, नहीं तो तुम अलग से एक आनंद पैदा कर दोगे और उसकी नकल में फंस जाओगे। मैं भी निर्णय नहीं करूंगा कि मूल क्या है, क्योंकि निर्णय कर दिया तो वैसा बन जाएगा, एक और नई दुनिया तैयार। आप कुछ तैयार मत करो, बस अपने आप को सुधारो; क्या होगा क्या नहीं होगा, वह छोड़ दो।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26