प्रश्नोत्तर P19-0120 · भाग 19
गुरु जी, आप एक-दो घंटे सत्संग करके आराम कर सकते थे; सुबह से रात तक लगातार क्यों बोलते रहते हो?
मुझे कोई रोकने वाला नहीं है, मैं एक घंटा सत्संग करके अंदर बैठ जाता, आराम से भोजन करता। पर पता नहीं कौन से शब्द से, कौन सी लाइन से आपका कल्याण हो जाए। आप साल भर में एक-एक घंटा लेते तो कितना होता — तो एक ही दिन में इतना देता हूं कि कई महीने का हो जाए। मेरे जीवन में पहले काम, बाद में आराम; क्योंकि काम में कुछ लोग हैं, मैं उनकी भावनाओं को समझता हूं, उनकी इज्जत करता हूं। समय दिया तो पूरी तरह दिया, नहीं तो मना कर दूंगा — मैं इतना जवाबदार इंसान रहा। अभी नहीं, तो कभी ना कभी आपको समझ आएगा कि वह व्यक्ति क्यों चिल्ला रहा था — जैसे मां-बाप बचपन से चिल्लाते हैं और हम उनके जाने के बाद समझते हैं।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19