आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0117 · भाग 19

गुरु जी, आप कहते हो कि आप अपने जीवन में बहुत ईमानदार रहे। वह ईमानदारी कैसी है?

जितना बोलता हूं उतना करना है, तभी बोलता हूं — फॉर्मेलिटी पूरी नहीं करता। कोई जाता है तो किराया-भाड़ा पूछ लेता हूं, और सच में देने के लिए ही पूछता हूं; ऐसा नहीं कि कैमरे पर कुछ और, जिंदगी में कुछ और — जैसा हूं पूरी तरह वैसा हूं। पहले जब दवा का काम करता था, लोग कहते महाराज जी श्रद्धा-विश्वास से खाएंगे; मैं कहता नहीं, गाली देते हुए खाओ, दवा काम करेगी, इसमें आशीर्वाद और श्रद्धा की आवश्यकता नहीं। लोग फोटो लगाकर पूजने लगे, "माता जी प्रणाम" कहने लगे, तो मैं कहता मैं लड़का हूं — मुझे यह पसंद नहीं, क्योंकि मुझे कुछ बनना नहीं है। मैं काम को बहुत ईमानदारी से करता हूं, ताकि जब उससे मिलूं तो कह सकूं कि जिस काम को लिया था, पूरी ईमानदारी से किया; कोई कमी हो तो मुझे बचा।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19