प्रश्नोत्तर P18-0157 · भाग 18
गुरु जी, समाज में वह इंसान भी है जो सही प्लेटफॉर्म बताता है, और वह भी जो कहता है "हजार रुपये रखो तभी फाइल आगे बढ़ेगी" — तो समाज में दोनों चीजें हैं; बेईमानी समाज से मिली, भले ली हमने — क्या यह सही है?
तरीका हम लेकर पैदा होते हैं — आपने अपने तरीके से ले लिया। अगर आप नहीं लेते और समाज जबरदस्ती देता, तब आप बोल सकते थे कि समाज जिम्मेदार है; तो सीधा क्यों न बोलें कि जिम्मेदार मैं हूं। समाज में हर चीज है, सबकी दुकान लगी है, सब बिक रहा है — आपको क्या खरीदना है, देख लो। गिरते समय भी आपको लग रहा था कि मैं गिर रहा हूं — इतनी समझ थी। हम भी पहले सोचते थे कि लोग हमारे साथ गलत करते हैं, सब मतलब रखते हैं; बाद में समझ आया कि जो कुछ हो रहा है उसका जिम्मेदार एक व्यक्ति है — स्वयं, और कोई भी नहीं। मैं भी उससे गुजरा हूं, जिससे आप जूझ रहे हैं।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22