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प्रश्नोत्तर P18-0131 · भाग 18

गुरु जी, अटैचमेंट (लगाव) क्या है? माता-पिता से लगाव तो प्रेम से है, उसमें हमें कुछ नहीं चाहिए — फिर भी लगाव क्यों है, और उसे मिटा भी नहीं सकते?

लगाव जरूरत का लगाव है। प्रेम तो तब होगा जब आपको कुछ नहीं चाहिए; उसके पहले प्रेम नहीं हो सकता। माता-पिता ने आपको पाला है, आपको उनसे मिला है, इसलिए लगाव है — रास्ते के अनजान व्यक्ति से लगाव लगाकर देखिए, नहीं होगा। ताऊ-ताई, चाचा-चाची भी तो माता-पिता समान हैं, उनसे उतना लगाव क्यों नहीं? क्योंकि वहां से उतना मिला नहीं। लगाव तब होता है जब आपके तरीके से आपको कुछ मिलता है — स्नेह, प्यार, आशीर्वाद, या "अच्छा पुत्र हूं" का सुख, या कर्तव्य-दायित्व निभाने की शांति। एक-दूसरे से जुड़ने का मतलब जरूरत है; जरूरत हटा दो तो आप किसी से जुड़ ही नहीं पाओगे। कुछ मिटाइए मत, कुछ पकड़िए मत — न कुछ पकड़ना है न कुछ छोड़ना है, उस स्थिति में आना है।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22