प्रश्नोत्तर P18-0125 · भाग 18
गुरु जी, आपने एक महाराज जी को एक साल में आत्मज्ञान करवाने की बात कहकर 12 दिन का निर्जल व्रत दिया था — वह अद्भुत घटना क्या थी?
वे आत्मज्ञान के लिए बहुत व्याकुल थे, कहते थे मैं कुछ भी कर सकता हूं, मर भी सकता हूं। मैंने कहा — सोच-समझकर फैसला लो, मैं जो बोलूंगा वही करना है, अभी भी पीछे हट सकते हो। उन्होंने हां कहा तो 12 दिन का निर्जल व्रत (बिना पानी) दिया। चार-पांच दिन बाद वे बार-बार नहाने लगे, पानी में रुकने लगे, तो मैंने रोका। उन्हें नहीं पता था, पर मुझे पता था — एक साल में आत्मज्ञान भी करवाना है और इन्हें जीवित भी रखना है, दोनों मेरी जिम्मेदारी थी, चाहे मुझे जाना पड़े। मैंने उन्हें संशय में रखा था। सातवें दिन के आसपास रात को मैं आंखें बंद किए लेटा था, तब उनकी जीवात्मा (सूक्ष्म शरीर) नींद में निकलकर मेरे पास आई और गिड़गिड़ाने लगी — "मुझे बचा लो।" मैंने उसे बंद आंखों से प्रत्यक्ष देखा, रोंगटे खड़े हो गए; आंख खोली तो वह चली गई। फिर उन्होंने पूछा "पानी पी लूं?" — मैंने कहा यह आपके ऊपर है; पी लिया तो बात खत्म, साधना में जी भी सकते हो मर भी सकते हो। उन्हें जीना था, तो उन्होंने आठवें दिन पानी पी लिया।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22