आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0114 · भाग 18

गुरु जी, आप कहते हैं भाव आखिरी तक रहता है, लेकिन जो भाव बनते-मिटते रहते हैं, उन्हें क्या कहेंगे?

वो तो इच्छा और अपेक्षा में बनते-मिटते हैं। लेकिन इच्छा-अपेक्षा से परे भी भाव है — स्वभाव, आत्मिक भाव — कि आप किस लिए निकले। जो इच्छा-अपेक्षा में उठेंगे वो मिट जाएंगे, लेकिन जिस कारण से आप अध्यात्म की तरफ आगे बढ़े हो, वह भाव नहीं मिटता। (क्या यह भाव बाकी प्राणियों में भी होता है? — उसका नहीं बोल सकते, क्योंकि सिद्ध कैसे किया जाए; इतना पक्का है कि मानव में होता है।)

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22