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प्रश्नोत्तर P17-0186 · भाग 17

गुरु जी, जब सुख और दुख दोनों नकली हैं, तो जीवन किसके सहारे जिएं — कोई ठोस आधार तो चाहिए? और कभी-कभी उस स्थिति में पहुंचते हैं, हमेशा के लिए स्थिर कैसे हों?

आपका आधार आपकी उपलब्धि है — आनंद, जहां न सुख है न दुख। और स्थिति में पहुंचने के बाद आप लेने-देने के लिए फिर बाहर जाते हो — तो लेने-देने का भाव छोड़ो।

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