प्रश्नोत्तर P17-0143 · भाग 17
गुरु जी, मैं जो भी बनी, दूसरों के लिए बनी, चीजों में अपनापन डालकर खुद को साबित करना चाहती रही — क्या मेरे अंदर कोई कमी है, या मुझे सही मार्गदर्शन नहीं मिला?
आपको जीवन में सत्संग नहीं मिला, आपके बारे में आपको बताया नहीं गया। हमेशा यही बताया गया कि यह बनो, बनने में तुम हो। बाद में कोई गुरु बताता है कि बनने से मुक्त होने में तुम हो — बनने में तुम कहां, तुम तो न बनने में हो। सोने की चेन पहनोगे तो कॉलर खोल दोगे; पर कहा जाए एक किलो सोना पेट में रख लो जो किसी को न दिखे, तो बर्दाश्त नहीं कर पाओगे — दिखना चाहिए। उसके द्वारा अपने आप को खड़ा करना चाहते हो। तुम कुछ नहीं हो; तुम कुछ होना चाहते हो — यही बंधन है, और "कुछ नहीं" में ही तुम हो। अपने लिए तुम्हें नाम, पढ़ाई, वकालत, प्रोफेसरी की क्या जरूरत है? यह सब लोगों के लिए बनते हैं, लोगों को निमित्त बनाकर अपने अहम भाव को पोषित करते हैं।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21