प्रश्नोत्तर P17-0140 · भाग 17
गुरु जी, कई बार लगता है कि यह माहौल, यह घटना पहले भी बहुत बार मेरे साथ घट चुकी है — ऐसा क्यों?
जितनी बार मानव शरीर में जन्म हुआ होगा, उतनी बार पढ़ाई की होगी, उतनी भाषाएं सीखी होंगी — जो भाषा आप बोल रही हो वो पहली और आखिरी तो होगी नहीं। वैसे ही जितने जन्मों से हम घूम रहे हैं, ऐसा नहीं कि पहली बार यहां बैठे हैं — पता नहीं कितनी बार बैठे होंगे, और अगर अपने आप को नहीं छुड़ा पाए तो पता नहीं कितनी बार और बैठेंगे। जब तक निकल नहीं जाते, यहां दो ही काम हैं — एक फंसने वाला, एक निकलने वाला। आप ऐसे ही घूम रहे हो, कभी फंसने वाली जगह, कभी निकलने वाली जगह।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21