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प्रश्नोत्तर P17-0123 · भाग 17

गुरु जी, "जीवित ही मर जाए, उलट आप में समाए" — क्या यह वही स्थिति होती है?

जीवित ही मर जाने का मतलब है हमारी इच्छा और अपेक्षा का मर जाना। इच्छा-अपेक्षा ही जन्म-मृत्यु है। जिंदा कौन है? इच्छा और अपेक्षा — इन्हीं के कारण हम इस संसार में हैं। अगर हम इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो गए तो अपने पिंड में, अपने आप में हो गए। अपनी इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो जाना ही (जीते जी) मरना है।

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