प्रश्नोत्तर P17-0093 · भाग 17
गुरु जी, मुझे संसार का कुछ नहीं चाहिए, बस परमात्मा चाहिए, उसके साथ रहना है — यह भाव कैसा है?
परमात्मा किसलिए चाहिए? कुछ नहीं चाहिए तो उसे लेकर क्या करोगे? ज्यादातर लोग परमात्मा इसलिए मांगते हैं कि फिर करोड़ मांग लेंगे — तो सीधा बोलो ना "पैसे के लिए, माल के लिए परमात्मा चाहिए", घुमा-फिराकर क्यों? और साथ रहना चाहते हो — कभी सोचा वह आपके साथ रहना चाहता है? आपके अपने लोग आपके साथ रहकर थक गए, आप खुद अपने साथ रहने में घुटन महसूस करते हो, तो उस परमात्मा को एक घुटन वाले इंसान के साथ रखकर पीड़ा देना चाहते हो? अगर कहो "उसके जैसा होना चाहता हूं" तो मतलब शक्तिशाली बनना है। जब उसके अलावा दूसरा कुछ है ही नहीं, तो उसका साथ तो अभी भी है — बीच में पर्दा पड़ा है, और वह पर्दा उसकी तरफ से नहीं, हमने लगाया है; तो पर्दा उठा दो, गिरा दो, फाड़ दो या आग लगा दो, और कामना उससे करते हो कि "तू उठा"। जब मैं उस लायक हो जाऊंगा तो वह खुद आ जाएगा — आपके पास उसका पता नहीं, उसके पास सबका पता है, जब चाहे खोज लेगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21