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प्रश्नोत्तर P17-0088 · भाग 17

गुरु जी, नौ द्वारों के अलावा दसवां द्वार भी सुना है — वह कैसे खुलेगा?

दसवें द्वार में तो हाथ ही नहीं लगा सकते, जहां हाथ नहीं लगा सकते उसकी क्या बात करें। उसके लिए सीधा-सीधा सत्कर्म — सब दरवाजे खुल जाएंगे; दसवां, ग्यारहवां, जितने भी बुरे कर्मों से बंद हुए, सत्कर्म अपना लो, खुल जाएंगे। दरवाजा ना किसी और ने बंद किया, ना कोई और खोलेगा — मेरे कर्म से बंद हुए, मेरे कर्म से खुलेंगे। यह ऑटोमैटिक दरवाजा है, बस वहां जाकर खड़ा होना है। लेकिन आपने तो अपने आप को कामनाओं में, वस्तुओं में, रूप-रंग में, "यह भी मेरा, वह भी मेरा" में कई जगह खड़ा कर रखा है; बाहर से पूरी तरह छूट जाओगे तब वहीं जाकर खड़े होगे, और जैसे ही खड़े हुए, गेट खुला।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21