प्रश्नोत्तर P17-0076 · भाग 17
गुरु जी, साधु, संत, महामंडलेश्वर — ये उपाधियां क्या हैं? साधु की असली परिभाषा क्या है, और भेष (भगवा वस्त्र) का क्या महत्व है?
ये सब उपाधियां हैं। मूल यह है — "सा" से साधु, "धू" से धूल: जिसने अपनी धूल साफ कर दी, अपने आप को निर्विकार कर लिया, वह साधु से संत हो गया, चाहे कहीं भी हो — यही परिभाषा है। जैसे गृहस्थ में पति-पत्नी का दर्जा समाज देता है, लेकिन माता-पिता का दर्जा बच्चे के जन्म के बाद प्राकृतिक मिलता है, कोई करवा नहीं सकता। जो साधना करता है वह साधक है। भेष का महत्व इतना है कि उससे समाज समझ जाता है कि यह परमात्मा के लिए, आत्मज्ञान के लिए निकला है, किस संप्रदाय को मानता है — तो लोग इज्जत देते हैं, रहने-भोजन की व्यवस्था करते हैं, बताने की जरूरत नहीं पड़ती। अब उस सहायता का आप सदुपयोग कर रहे हो या दुरुपयोग, यह आपके ऊपर है।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21