प्रश्नोत्तर P17-0069 · भाग 17
गुरु जी, अगर आत्मदर्शन की जरा सी भी इच्छा है तो यात्रा की शुरुआत कैसे करें?
सर्वप्रथम कर्म के प्रति छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — इन आठ में से एक भी मत करो। दिखावा छोड़ दो, बड़ा-छोटा बनने की इच्छा का त्याग करो, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो — अब यात्रा की शुरुआत होगी। ईमानदारी अपनाओ (ईमानदारी स्वाभाविक होती है, करनी नहीं पड़ती) और सत्कर्म में लग जाओ। इतना अपनाओगे तब शुरुआत होगी — अपने को समझने की नहीं, निर्विकार होने की। जैसे-जैसे निर्विकार होंगे, अपने करीब जा रहे हैं, धीरे-धीरे आपको अपने होने का एहसास होने लगेगा, और जब पूरी तरह निर्विकार हो जाएंगे तो आत्मदर्शन हो जाएगा, बात ही खत्म। यह नहीं अपनाएंगे तो कभी नहीं हो सकता।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21