प्रश्नोत्तर P17-0067 · भाग 17
गुरु जी, लोग कहते हैं "बेईमानी के बिना कैसे चलेगा?" — क्या बेईमानी रखते हुए आत्मदर्शन या सत्य की खोज हो सकती है?
लोग आकर कहते हैं मैं इतने साल से इन गुरु से जुड़ा हूं, और कहते हैं बेईमानी बिना कैसे चलेगा — तो उस गुरु ने आपको कैसे स्वीकार किया और आपने उसे कैसे, जब मूल ही नहीं छुड़ाया? यह अपने आप नहीं छूटेगा, आपने किया है तो आपको छोड़ना पड़ेगा; पूरी तरह ईमानदार होना पड़ेगा, बेईमानी का त्याग करना पड़ेगा। अपने आप को तब समझ पाएंगे जब निर्विकार होंगे, और विकार आते कहां से हैं? बेईमानी से। बेईमानी नहीं छोड़ी तो शब्दों का ज्ञान रहेगा और विकार और जमा होते जाएंगे। फिर तो यहां आना भी बेकार है, समय बर्बाद कर रहे हो — जाओ और दौलत, वैभव, रिश्ते बढ़ाओ। सत्य की खोज बेईमानी से नहीं हो सकती। मूल बात: कर्म के प्रति छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — आठ में से एक भी मत करो, विकार नहीं आएंगे। यह नहीं करोगे तो साक्षात ब्रह्मा-विष्णु-महेश भी आ जाएं, कुछ नहीं कर सकते।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21