प्रश्नोत्तर P17-0050 · भाग 17
गुरु जी, कहा जाता है कि मन ही काल है — इस पर क्या कहेंगे?
मन अगर आपका रुक जाए तो ब्रेन खत्म, जिंदगी नरक। काल क्या है? इच्छा-अपेक्षा। इच्छा-अपेक्षा में हो तो काल आएगा, मार के ले जाएगा — जब मृत्यु आएगी तब काल आएगा। एक-एक क्षण आप मृत्यु की तरफ जा रहे हो, ये भी काल है — भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्य काल, रात्रि काल — सब चीज के पीछे काल लगा है, ये काल का ही लोक है, इसलिए उसे काल कहा गया। मन काल कैसे होगा? मन तो इंगित कर रहा है। एक बात ध्यान से समझो — जिन महापुरुषों को उपलब्धि हो गई, काल से मुक्त हो गए, कामनाएं भी खत्म हो गईं — अगर मन काल था और भोजन की जरूरत काल को थी, तो काल तो गया; फिर उन्होंने भोजन क्यों किया, लोगों से भोजन क्यों मांगा? वो शरीर के लिए भोजन कर रहे थे। दोहा है — "पाप पुण्य दो जाल, सारा जग भोजन बना, खाने वाला काल" — इसमें मन को काल नहीं बोला गया। जब तक पाप-पुण्य में हो, इच्छा-अपेक्षा में हो, तब तक काल एक दिन आएगा, आपको खाएगा ही; और इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो गए तो काल का काम खत्म — काल से कोई मतलब नहीं। मन तो आपका सबसे सहायक है। गाड़ी ठोक दी तो ब्रेक पकड़ा जाएगा कि ड्राइवर? ड्राइवर — जीव। एक ज्ञान मिला, एक और मिला — दोनों पास में आ गए, तो जो सही है उसे ले लो; खंडन क्यों कर रहे हो? बताना बंद करो, अभी आप सीखने वाले हो; दोनों में से एक पकड़ लो जिसे पकड़कर पार हो, तब जाकर फाइनल बोलना। खोजी बनिए, गुलाम मत बनिए।
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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04