प्रश्नोत्तर P17-0043 · भाग 17
गुरु जी, कोई कट लग जाए, एक्सीडेंट हो जाए, तो जो दर्द होता है वो किसको होता है?
"मेरा" के भाव को। मान लीजिए आपके पास कोई सामान है और उसे कुछ हो जाए तो दुख होगा; लेकिन होने से पहले आपने उसे बेच दिया और एक घंटे बाद कुछ हुआ, तो दुख नहीं होगा — क्योंकि "मेरा" का भाव छूट गया। जिसने "मेरा" का भाव बना रखा है, उसको दुख है। सामने से लाश गुजर जाती है तो कहते हो "इसकी आत्मा को शांति मिले", और कोई कह दे कि आपके परिवार का सदस्य है, तब और दुख होगा — क्योंकि मेरा है। जहां-जहां "मेरा" का भाव है, उसी से दुख है — मेरा शरीर, मेरे लोग। "मेरा" का भाव खत्म हो जाए तो ना सुख ना दुख — आनंद। पक्का हो जाए कि इस उंगली को कटाने से सारा हाथ बचेगा, तो कटवाकर खुश हो जाते हो; पर कुछ ना हुआ हो तो कटवाने में दुख है। जहां से मुझे सुख मिलता है, उसे कुछ भी होगा तो दुख होगा — चाहे मेरा शरीर हो, चाहे मेरे लोग; और जब "मेरा" ही मुझे दुख देने लगे, तो उसे अलग कर देते हो।
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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04