आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0032 · भाग 17

गुरु जी, तत्वदर्शी क्या होता है?

तत्वदर्शी — आत्मदर्शी। जब आत्मबोध होगा, आत्म का बोध होगा, तब आप तत्वदर्शी हो सकते हो। आत्मबोध मतलब स्वयं का बोध, आत्मज्ञान — उसके बाद ही तत्व का ज्ञान होगा। अभी जो ज्ञान है वो बस जानकारी है। पांच तत्वों की जानकारी है आपको, बोध नहीं; बोध तभी होगा जब आत्मबोध होगा, और आत्मबोध के बाद हो ही जाता है — जैसे आप पढ़ना सीख लिए तो कुछ भी लिखा देख लिया तो पढ़ ही लोगे, रोक भी नहीं सकते। उस एहसास को क्या बोलें — बोलने वाला ही खत्म हो गया; आत्मज्ञान शब्दों में नहीं बताया जा सकता, पर आत्मज्ञानी से जो शब्द निकल रहे हैं उनसे पता चल जाता है कि वो आत्मज्ञानी है या नहीं। तो आत्मबोध के चक्कर में पड़ो — किताब पढ़नी है तो पहले क-का-कि आए। जगत भी उसी से है और आप भी उसी से हो; अपने आप को समझ लिया तो इस जगत को भी समझ लोगे। पहले अपने आप को समझो — फिर जैसे पढ़ना सीखने के बाद हर पेज साफ होता जाता है, वैसे चीजें साफ होने लगती हैं।

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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04