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प्रश्नोत्तर P16-0195 · भाग 16

(लाइव) गुरुजी, प्रेम की नगरी तो वृंदावन धाम है ना?

मेरे लिए — देखिए, इस धरती पर मैंने प्रेम को समझा तो बस इतना समझा: अगर कुछ नहीं चाहिए तो विश्व में कहीं भी जाओ, आप प्रेम में जियोगे; और आपको कुछ चाहिए तो वृंदावन या वृंदावन के मंदिर में भी चले जाओ, तो आप घुटन में जियोगे। सीधी सी बात बता दूं — दुनिया में कहीं भी चले जाओ, उनको सीने से लगा के जिंदगी गुजार दो, लेकिन (कुछ चाहिए तो) आप घुटन में ही रहोगे; और आपको कुछ नहीं चाहिए तो दुनिया में कहीं भी चले जाओ, श्मशान में भी बैठे तो आप प्रेम में बैठे हो। बस इतना मैंने इस जिंदगी में समझा।

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वीडियो: अब जाऊं कहां / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-16