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प्रश्नोत्तर P16-0182 · भाग 16

मैं आंखों के आकर्षण के कारण किसी तक पहुंची, फिर उपराम आ गया — रूप ही तो चेंज है, और इसमें मैंने कितना फंसाव कर लिया। अब लगता है यह आंख ही मुझे भ्रमित कर रही है। तो क्या अब मेरा दायित्व यह होना चाहिए…?

आंख भ्रमित नहीं कर रही है। आंख के पीछे तो आप ही ले रही थीं ना। आंख तो बीच में है। ये शब्दों को बहुत खोलना पड़ेगा — ये शब्द ही आपको पहुंचाएंगे और शब्द ही आपको भटकाएंगे, और जैसा आप शब्दों को लेकर बोलोगे वही आप हो जाओगे, प्रिंट हो जाएगा। आंख बीच में है, आंख के पीछे आप हो, आंख के आगे दृश्य है। आंख तो निमित्त है, वो एक साधन है। इसके पीछे वाला सामने दृश्य का रस ले रहा है; उसे जानकारी है — जानकारी नहीं होगी तो रस नहीं ले पाएगा। आंख के पीछे वाला, और वैसा रूप सामने है जैसी उसकी चाहत थी, तब वो लिप्त हो जाता है। उसके पास उसे भोगने की समझ हो — भोगने की समझ नहीं है तो नहीं भोग सकता। तो आंख निमित्त है, ये ध्यान रखिए।

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वीडियो: खुद को जांच ने का तरीका #योगी · 2026-02-20