प्रश्नोत्तर P16-0170 · भाग 16
(लाइव) गुरु जी, पंच तत्व ज्ञान में संगीत का क्या योगदान है? क्या संगीत से भी पहुंचा जा सकता है?
संगीत उस तक पहुंचने का एक माध्यम है — लेकिन तब, जब संगीत का उपयोग उसके लिए कर रहे हो; तब एकदम पक्का पहुंचा जा सकता है। गंडकी की बात जानते हो? लोग जिसे दुनिया का सबसे बुरा काम मानते हैं — वेश्यावृत्ति — उसने उसको भी साधना बना लिया; और आप साधना करके भी साधना को साधना नहीं बना पा रहे हो। उसे वह काम जन्मजात मिला था, शौक से नहीं बनी थी; उसने भाव रखा कि 24 घंटे एक के साथ रहूंगी, और कोई भी हो, राजा हो या रंक, सबके साथ एक जैसा बर्ताव करूंगी, पति की तरह उसकी सेवा करूंगी — किसी को दुख नहीं देती थी, चोरी नहीं करती थी। विष्णु भगवान कोढ़ी का रूप लेकर उसकी परीक्षा लेने गए; वह सेवा में लग गई, 24 घंटे के अंदर उनके प्राण छूट गए, तो वह उस शरीर को लेकर श्मशान गई कि पति मर गया, अब रहकर क्या करूंगी — और जैसे ही आग लगाने गई, विष्णु भगवान प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। उसने कहा — सब सुख लिया, बस पुत्र-सुख से वंचित रही; तो बोले, मेरे गोद में आ जाइए — वही शालिग्राम है, गंडकी नदी से निकलता है। इस संसार में जो भी चल रहा है, कुछ गलत नहीं — गलत भाव हो सकते हैं, हमारा सोचना गलत हो सकता है। गलत बनने और मिलने में फर्क है — मैं गड्ढे में गिर गया, और मैं खुद गड्ढे में गिरूंगा, दोनों में फर्क है; जो गिर गया और उठना चाहे, उसकी मदद करो। कर्म ही तो पूजा है — जब कर्म के प्रति ईमानदार रहोगे तो आप सध ही जाओगे, निर्विकार हो ही जाओगे। गलती यही हो रही है कि हम अपने कर्म के प्रति ही बेईमानी कर बैठते हैं और अलग से साधना करना चाहते हैं — दिन भर टीका लगाकर, घंटी बजाकर, माला घुमाकर, और कर्म में बेईमानी। कर्म में ईमानदार हो तो सारी चीज बस खत्म। कृष्ण भगवान ने अर्जुन से कभी अपनी पूजा करवाई? बोले — कर्म करो अर्जुन, कर्म के प्रति निष्ठा से कर्म करो; कर्म ही पूजा है।
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वीडियो: पांच तत्वों का हमारे जीवन में महत्व / #पांच #तत्व #aadhyatmik #satsang · 2024-09-06