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प्रश्नोत्तर P16-0142 · भाग 16

बाहर की ऊर्जा तो आपने बता दी, अब अंदर की ऊर्जा के बारे में बताइए। अंदर की ऊर्जा एक ही होती है या इसके भी अलग-अलग स्तर हैं?

एक ही है — आत्मा से। लेकिन कर्म से वह जीवात्मा हो गया है, तो जैसा कर्म है वैसी उसे उपयोग करने की ऊर्जा मिली है। काम करके वह अपनी ऊर्जा को बढ़ा सकता है, अगर क्षमता है। मंदबुद्धि है, पागल है, तो कोई कुछ नहीं कर सकता — उसे ऐसा शरीर ही मिला है। अगर आपका समझने का स्तर है, आपको लग रहा है कि मैं समझ रहा हूं, तो मेहनत करके और आगे जा सकते हो। समझने के लिए आपको बोला जा सकता है, समझने की क्षमता नहीं दी जा सकती। जैसे यहां हर जीव की भोजन करने की क्षमता अलग है — हाथी का भोजन चींटी नहीं कर सकती, उसमें दब जाएगी; और चींटी का भोजन हाथी के किसी काम का नहीं, लेकिन चींटी का पेट उससे भर जाता है। तो शरीर, ऊर्जा सबको अपने-अपने कर्म से मिली है; अब आप कितना जागृत कर लेते हो, आपके ऊपर है। सत्कर्म से, मेहनत से ऊर्जा बढ़ाई जाएगी — जिस दिशा में आपको जाना है, उस दिशा में काम करना पड़ेगा।

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वीडियो: ऊर्जा के बारे में रहस्यमय ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #ऊर्जा रहस्यमय #ज्ञान #satsang · 2024-08-02