प्रश्नोत्तर P16-0136 · भाग 16
अंत में थोड़ा यह बताइए कि इच्छा क्या है और अपेक्षा क्या है?
इच्छा है योग्यता से ज्यादा पाने की चाह। जब आप योग्यता से ज्यादा पाना चाहते हो, वही इच्छा है; आपकी जरूरत, आपकी योग्यता जितना आपको मिल रहा है, उसे इच्छा नहीं कहते। पशु भी भोजन करते हैं, भोग करते हैं, लेकिन किसी पशु को कहा कि यह इच्छा-अपेक्षा में जीता है? आपकी सामर्थ्य नहीं है, आपको मालूम है मैं इस लायक नहीं हूं, फिर भी किसी के द्वारा वह पाना चाहते हो — यह इच्छा हमें पीड़ा देती है। और अपेक्षा मतलब उम्मीद: मैंने किसी के लिए किया और उम्मीद बनाकर रख ली, उससे बात भी नहीं की, उसे पता भी नहीं; समय आने पर उसने नहीं किया तो लगा इसने मेरे साथ धोखा किया। क्या उसने वादा किया था? आपने अपेक्षा क्यों रखी? वह करेगा तो सुख, नहीं करेगा तो दुख — दोनों स्थिति में आप फंस जाओगे। अगर अपेक्षा ही बांधनी थी, तो करने से पहले बात कर लेते कि मैं आपके लिए यह कर रहा हूं और बदले में मुझे यह चाहिए, तब करूंगा, नहीं तो नहीं। जैसे मान लीजिए आपको किसी पद की इच्छा है, योग्यता नहीं है, और आपने सेटिंग करके वह पद पा लिया — अब जितने लोगों से सेटिंग की है, वे जिंदगी भर आपको दबाएंगे। पहले उनके प्रति राग हुआ कि इन्होंने मुझे पद दिला दिया; अब वे आपका गलत तरीके से उपयोग करेंगे, क्योंकि पद दिलाने वाला तो गलत ही था। नकली चीज लास्ट तक नकली रहेगी; जिंदगी भर के लिए आप फंस गए। इसलिए जीवन में कभी भी योग्यता से ज्यादा मांग ना करना; और योग्यता से ज्यादा कोई दे रहा है तो पूछ लेना — भैया, क्यों दे रहे हो? इतनी कृपा क्यों कर रहे हो? हजारों लोग खड़े हैं, मुझे ही क्यों, मुझमें क्या खास देखा? जहां इच्छा नहीं होगी वहां अपेक्षा भी नहीं लगेगी। और यह तभी पूछ पाओगे जब आपकी योग्यता होगी; आपमें लालच होगा तो नहीं पूछ पाओगे। भटका हुआ इंसान मुझे भी भटका देगा, इसलिए साफ-साफ, सीधी, स्पष्ट बात करो। हमेशा अपनी योग्यता के अनुसार ही लेना चाहिए; योग्यता से ज्यादा जब भी मिले, मना कर दो। देने वाले को पता हो या ना हो, लेने वाले को अपनी योग्यता पक्का पता होती है। इसलिए अपनी पात्रता देखिए और उतना ही लीजिए जितना पच जाए — ज्यादा ले लोगे तो पचेगा भी नहीं।
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वीडियो: जीवन क्या है ? #योगी · 2025-10-07