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प्रश्नोत्तर P16-0134 · भाग 16

तो फिर मानव बनता कब है? मानव का चोला तो मिल गया — अगर मैं इस चोले में रहकर अच्छे कर्म करूं तो क्या होगा? मैं मानव कब कहलाऊंगी?

मानव तन तब तक रहेगा जब तक आपके जीवन में योग रहेगा — मतलब जब तक अपने आप को सुधारने की संभावना बनी रहेगी, तब तक आपको मानव तन ही मिलता रहेगा, जब तक आप परम साध्य तक ना पहुंच जाओ। लेकिन अगर आप अपने आप को सुधारने के बजाय बिगाड़ने लगे, भोग-भोजन में फंस गए, तो जीवन में योग रहा ही नहीं, फिर मानव तन से जाओगे। अच्छे कर्म करोगे तो यही शरीर मिलेगा। मानव होता ही नहीं, भाई — मानव शरीर का नाम है, मानव तन का नाम है। यह मानव तन है, यह कुत्ते का तन है, यह शेर का तन है। जैसे एक चपरासी को उसकी योग्यता अनुसार चपरासी का पद मिला था, कुछ समय बाद योग्यता बढ़ी तो मैनेजर बना दिया गया — तो क्या वह चपरासी था? शिक्षक की योग्यता देखकर स्कूल उसे प्रिंसिपल बना देता है — तो क्या वह शिक्षक था, क्या वह प्रिंसिपल था? जैसे एक ही कनेक्शन में पंखा लगा दो तो नाचेगा, बल्ब लगा दो तो उजाला देगा — ऊर्जा वही की वही है। जैसा कर्म है वैसा शरीर मिला; ना यहां कोई मानव है, ना कोई पशु — शरीर है।

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वीडियो: जीवन क्या है ? #योगी · 2025-10-07