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प्रश्नोत्तर P16-0056 · भाग 16

गुरु जी, "कलियुग केवल नाम अधारा" — इसका क्या रहस्य है?

बस नाम लेके बैठ जाओ, और उठो तब जब उपलब्धि हो जाए; उसके पहले उठना भी मत। "कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा" — जब तक पार उतर ना जाओ, तब तक जपते रहो; इसका मतलब यह है। ऐसे ही "सारे तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार" — सारे तीरथ तब तक जाते रहो जब तक राग-द्वेष से मुक्त ना हो जाओ; राग-द्वेष से मुक्त हो गए तो गंगा सागर। अब लोग इसका मतलब निकालते हैं कि सारे तीर्थ मत जाओ, गंगा सागर गए तो सब तीर्थों का फल मिल गया — यही गड़बड़ है, आपने अपने मतलब से अपना अर्थ निकाल लिया। "तीरथ गए तो एक फल, संत मिले फल चार; सतगुरु मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार।"

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वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16