प्रश्नोत्तर P15-0191 · भाग 15
जहां भी सत्संग में गए, यही बताया गया कि मन तुमको चला रहा है। क्या सच में मन हमें चलाता है?
सारा मन का नहीं, तुम्हारा खेल है — अपने आप का ही खेल है। आपसे मन है, तो मन कैसे आपको चलाएगा? जो है भी और नहीं भी है, उससे क्या तकलीफ? वो तो आपका सहायक है। आपको बाथरूम लगी तो मन तुरंत बताता है, जब तक निकाल नहीं दोगे तब तक बताता रहेगा। उसका काम है आपको सचेत करना — भूख लगी, भोजन करो; करना ना करना तुम्हारे ऊपर है, परिणाम भोगोगे तुम। और गहराई में जाओगे तो वह आपके लिए काम ही नहीं करता, वह शरीर के लिए काम करता है — जैसे पलक आंख की रखवाली करती है, आपसे कोई मतलब नहीं। पहले आप नशा नहीं करते थे तो मन कभी नशे पे नहीं गया; जब आपने शरीर को नशा दिया और बाद में देना बंद किया तो मन नशे पे गया, क्योंकि वह शरीर को चाहिए। मन यह नहीं कह रहा कि तुम पियो; तुमने शरीर को पिला दिया, आदत डाली, वह बताता है कि शरीर को यह जरूरत है। इसलिए आपके छोड़ने के बाद भी मन वहां जाता है, क्योंकि शरीर चेतन है।
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वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16