प्रश्नोत्तर P15-0184 · भाग 15
गुरु जी, आत्म ध्यान और परम ध्यान में क्या अंतर है?
आत्म ध्यान मतलब आप अपनी तरफ बढ़ना चाहते हैं, बाहर से अपने आप को छुड़ाना चाहते हैं। और परम ध्यान अपने आप होता है, उसमें आप कुछ भी नहीं कर सकते; पहले आत्मज्ञान तक तो पहुंचो। जैसे मान लीजिए कोई विवाह कर ले, तो वो गर्भधारण के लिए प्रयास करता है — तब ध्यान बाहर रहता है कि मेरा गर्भधारण हो जाए; और जब गर्भधारण हो जाता है, तब उसका ध्यान अंदर ही गर्भ के प्रति लगा रहता है, बाहर नहीं जाता, और एक समय ऐसा आता है कि मां बन जाती है। वैसे ही आत्मज्ञान के बाद परम ध्यान घटित होता है, और एक समय ऐसा आता है कि परमात्मा से उसका मिलना हो जाता है। गर्भधारण तक प्रयास है; मां-बाप बनने का कोई प्रयास करता है? उसके बाद सिर्फ इंतजार है। आत्मज्ञान तक प्रयास करना है; आत्मज्ञान के बाद आप प्रयास से मुक्त हो गए — उसके बाद सिर्फ इंतजार।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11