आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0134 · भाग 15

गुरु जी, मुझे आत्मज्ञान और परमात्मा से मिलने की बहुत जल्दी है, क्या करूं?

बस उम्मीद छोड़ दो। एकदम सीधा मिलना हो जाएगा, तुरंत — अपने से भी और परमात्मा से भी। एकदम आसान रास्ता है, ये आखिरी है आध्यात्म का; अगर सीधा मिलना है तुरंत तो यही रास्ता है। उम्मीद छोड़ दो, बात खत्म, उसी जगह पे मिलना हो जाएगा। उम्मीद तो प्राणी परमात्मा से मिलने की भी करता है — वही तो छोड़ना है, तो वो आके मिल लेगा। तुम्हारी उम्मीद छूटी तो उसका आना हुआ। वो तो उसी से मिलता है जिसकी उम्मीद छूटती है — कि कौन सा ऐसा व्यक्ति है पृथ्वी पर जिसने उम्मीद ही छोड़ दी; अब वो पृथ्वी के लायक नहीं रहा, चलो अब निकल लो। क्योंकि जब तक उम्मीद है, तभी तक आप यहां बने हैं।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11