प्रश्नोत्तर P14-0169 · भाग 14
अष्टावक्र जी ने जनक जी से कहा कि तू संग-रहित है, निष्क्रिय है, स्वयं-प्रकाशित है, सभी दोषों से परे है — ऐसा ध्यान करता हुआ जो समाधिस्थ हो रहा है, यही तेरे बंधन का कारण है। कृपया समझाइए।
तो बस हो जाओ, और क्या? समझ लो कि आप दोष-रहित हो, स्वयं से प्रकाशित हो, कुछ भी नहीं हो और सब कुछ तुम ही हो; सब तुमसे है, देख लो।
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वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18