प्रश्नोत्तर P14-0104 · भाग 14
गुरु जी, मेरा ज्ञान तो नकारात्मक है — नेति-नेति द्वारा यही ज्ञान होता है कि शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार मैं नहीं; कोई आकार, गुण, इच्छा स्थाई नहीं; कर्ता भ्रम है, माया मात्र है।
ठीक है, लेकिन अभी तो कर्ता में हो ना। अकर्ता में कैसे आ जाओ, उसके लिए काम करो, समझो, आगे बढ़ो। गाली में जो शब्द प्रयोग होते हैं वही भजन में होते हैं, बस बोलने का तरीका अलग है। जो तरीका अहम भाव से धारण किए हो, उस तरीके से अपने आप को छुड़ा लो।
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वीडियो: ईश्वर सर्वव्यापी है इसका क्या मतलब है / #ईश्वर #सर्वव्यापी · 2024-04-10