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प्रश्नोत्तर P14-0059 · भाग 14

गुरु जी, हर कर्म बंधन देता है, प्रारब्ध को गढ़ता है — ईमानदारी से किया कर्म भी?

हर कर्म से प्रारब्ध खड़ा हो रहा है — जब प्लानिंग से करोगे। प्लानिंग से सेवा करोगे तो उसमें भी प्लानिंग आ गई, पुण्य वाला खड़ा होगा। पुण्य प्लानिंग से बनता है, पाप प्लानिंग से बनता है; प्लानिंग नहीं तो कुछ नहीं बनता। बिना प्लानिंग के, बस ईमानदारी से कर्म करोगे तो प्रारब्ध नहीं बनता। इसीलिए तो मैं कहता हूं — बेईमानी छोड़ के ईमानदारी अपना लो, काम हो गया। ये सब ग्रंथों का सार है; इतना अगर आदमी समझ जाए तो मुक्ति से मोक्ष तक पहुंच जाएगा।

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