प्रश्नोत्तर P14-0048 · भाग 14
गुरु जी, परमात्मा को पाने की राह में निकलें तो जो घर-गृहस्थी खड़ी कर दी है, उसे छोड़ के निकलना चाहिए, जंगलों में जाना चाहिए, या उसे साथ रख के चलना चाहिए?
जंगल में जाओगे तो क्या छोड़ के जाओगे? एक परिवार छोड़ोगे, अनेक परिवार मिल जाएंगे; संसार तो कहीं भी नहीं छूटेगा। मैंने जीवन में यही समझा कि अगर छोड़ने के लिए आपके पास कुछ है तो बेईमानी — और क्या छोड़ोगे? जगह बदलोगे, कपड़े, भोजन का तरीका, बातचीत का तरीका, शरीर का नाम बदलोगे। हमने जरूरत कम की, लेकिन एक कपड़ा तो अभी भी है — हजार रखो, पहनोगे तो एक ही। आप चाहे गृहस्थी में रहो, चाहे संन्यासी होके, छोड़ना बस इतना है — बेईमानी। जहां रह रहे हो वहां ईमानदारी से आपकी आवक हो, और उस आवक से घर-गृहस्थ चलाते हुए सत्कर्म में लग जाओ — यही आपको मुक्ति से मोक्ष तक लेके जाएगा। मैंने विवाह नहीं किया, खोज करने निकला, जरूरत कम करते-करते ऐसी स्थिति आई कि प्रश्न हट गए; काम तो मैं अभी भी कर रहा हूं — आप एक दायरे में परिवार के लिए कर रहे हो, मैं दायरे को पार करके पूरे समाज के लिए। भाव अलग है बस।
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वीडियो: इतने सरल ज्ञान को इतना रहस्यमय क्यों बना दिया गया | Why is Simple Truth made so Mysterious? in Hindi · 2026-03-06