आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0038 · भाग 14

गुरु जी, ध्यान में बैठे हुए क्या परमात्मा की इच्छा भी खत्म करनी है? परमात्मा का ध्यान कैसे करें?

परमात्मा का ध्यान कैसे करोगे? वो निराकार है, आप उसे जानते ही नहीं। ध्यान हो, योग मार्ग हो, भक्ति मार्ग हो, क्रिया मार्ग हो — अपने आप को निर्विकार कराने के लिए करना है। पहले आत्म तक तो पहुंचो; अपने आप को शुद्ध, पवित्र, निर्मल करने के लिए यात्रा करनी है। महापुरुष उपलब्धि के बाद बोले, और किसी ने सीधा परमात्मा की यात्रा नहीं बताई — सबने एक ही बात कही: अपने आप को निर्मल, पवित्र करो। ईमानदारी मुक्ति है, बेईमानी बंधन; बेईमानी का पूरी तरह त्याग करके ईमानदारी अपना के परोपकार में लग जाओ। मन एक ही है, दो जगह नहीं हो सकता — या तो माया में रहोगे या ब्रह्म में। वो शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श से परे है, तो कुछ करके कैसे मिलेगा? ध्यान करने से आप निर्विकार होगे, और निर्विकार होने से आप मिलोगे — ब्रह्म नहीं। आपके बाद यात्रा होगी ब्रह्म की। जैसे कोई मादा गर्भ धारण ना करे और कहे मैं मां बन जाऊंगी — ऐसा नहीं हो सकता। ये आवेश-जज्बात का मार्ग नहीं, समझ का मार्ग है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05