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प्रश्नोत्तर P14-0035 · भाग 14

गुरु जी, जो तप करके अपने को मिटा देगा, वो भी तो फिर कुछ हो जाएगा — कुछ होने के लिए ही तो उसने तप किया?

पहले मिटाओ तो। जो मिटने चला, वो तो मिटेगा। मिटाने लगोगे तो एक समय ऐसा आएगा कि कुछ नहीं हो जाएगा, मिटने के लिए कुछ रहेगा ही नहीं। वहां भी कुछ रहे तो उसको भी मिटाओ। परिवर्तन होते-होते एक समय ऐसा आएगा कि वह अपने परम अस्तित्व पर आ जाएगा, जहां मिटने-मिटाने के लिए कोई नहीं रहेगा। उसमें अहंकार नहीं होता कि मैंने खुद को मिटा दिया। कुछ पाने के लिए मिटा रहे हो तो अहम भाव तैयार होगा और एक नए अस्तित्व का निर्माण कर बैठोगे; अगर कुछ नहीं चाहिए और मिटा रहे हो तो वह समर्पण भाव है, उसमें अहम भाव काम नहीं करता। कई ऐसे हुए जो तप करके बहुत ऊंची स्थिति में गए, फिर प्राकृतिक संसाधनों में फंस के नीचे आ गए — लेकिन गिरने में ही उन्हें समझ में आया कि मैं क्या था, क्या हो गया, मेरा व्यक्तिगत अस्तित्व क्या है, मैं किस भाव से भोजन ग्रहण कर रहा हूं। ये करने से ही होगा, बातों से नहीं।

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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05