आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0033 · भाग 14

गुरु जी, क्या गर्मी-सर्दी से बचने का उपाय भी नहीं करना चाहिए?

अगर आप गृहस्थ छोड़ के निकले हो और आप पर कोई जवाबदारी नहीं, तो बचना क्यों? मिटाना है। बच के क्या करेंगे? कभी न कभी तो मिटेंगे। मृत्यु स्वीकार करनी पड़ेगी, सीधी बात है। अभी तो एकदम सुरक्षा में बैठे हो और कह रहे हो मैं मृत्यु को स्वीकार कर रहा हूं — पहले उस स्थिति में पहुंचो, मृत्यु सामने आए तब। वस्त्रों का सहारा, भौतिक चीजों का सहारा छोड़िए; तन पर बस इतना कपड़ा रहे कि तन ढका रहे। जितने भी लोग पहुंचे, सबने तप किया। जिसका श्लोक, जिसका दोहा आप सुनाते हो, वह बिना तप के नहीं पहुंचा — जिज्ञासा भी थी, प्रबल इच्छा भी थी, अपने आप को मिटाने के लिए तैयार भी थे। (जिस पर परिवार की जवाबदारी है, उसके लिए ये नहीं है; उसके लिए सबसे सरल मार्ग है — आंतरिक ईमानदारी, मेहनत, मेरे कर्म से किसी को तकलीफ ना हो, दरवाजे से कोई भूखा-प्यासा ना जाए, और ईमानदारी से कमाया धन परोपकार में लगाए।)

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वीडियो: जीवन में तप का महत्व / #योगीजी_का_सत्संग #जीवन #तप #महत्व #satsang · 2024-08-05