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प्रश्नोत्तर P14-0006 · भाग 14

गुरु जी, आपसे प्रेम हो रहा है या मोह, कैसे पता चलेगा?

मोह तो हो नहीं सकता, क्योंकि मेरे पास कुछ नहीं है। अभी गुजरात से पति-पत्नी आए थे; दोबारा पति आए और जाते समय कहा कि मेरी पत्नी नहीं आ पाई, उन्होंने कहा है कि आप अपने हाथों से कुछ दे दीजिए। मैंने देखा, क्या दूं, क्या दूं — आखिर में मैंने कहा, मेरे पास कुछ देने के लिए नहीं है, अपना ख्याल रखिए बस। तो मोह मुझसे नहीं हो सकता, क्योंकि मेरे पास कुछ है नहीं; अगर होगा तो मुझसे प्रेम होगा। मोह में तो आप मेरे पास रह भी नहीं सकते, मोह में तो आप मुझे सुन भी नहीं सकते। मेरे पास कुछ है ही नहीं, मैं आपको दूंगा क्या? बिस्किट दूंगा तो वो आपके शरीर को दूंगा। लेकिन आपको देने के लिए मेरे पास आपके अलावा कुछ नहीं है। तो मेरा भाव बस इतना है कि आपका आपसे मिलना हो जाए, क्योंकि जब तक ये नहीं होगा तब तक आप ऐसे ही अधूरे घूमते रह जाओगे। मैं किसी को वस्तुएं देकर खुश नहीं करना चाहता; वस्तुएं शरीर तक हैं। मैं चाहता हूं आपका आपसे मिलना हो जाए — आपको आप मिल जाओगे, बात खत्म हो जाएगी। जिस क्षण, जिस पल आपका आपसे मिलना होगा, उसी क्षण आप पूर्णता में हो जाएंगे। आपकी कमी आपके मिलने से ही जाएगी; ये कमी किसी वस्तु से नहीं जाएगी। आपको कुछ भी मिल जाए, कमी बनी रह जाएगी — देव दर्शन भी हो जाए तो भी वो कुछ क्षण के लिए है। जब आपका आपसे मिलना होगा, फिर वो कमी हट जाएगी।

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वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20