आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0085 · भाग 13

गुरु जी, मैं दुकान करता हूं — खाद बेचता हूं, उसमें दवाइयां भी बेचता हूं और उस दवाई से कीड़े भी मरते हैं; उसमें क्या करूं?

आप देख लो। जब आपको पता है तो मैं क्या बताऊं; नहीं पता होता तो मैं बताता। फैसला आपके; मैं कुछ बोल भी नहीं सकता कि किस स्थिति-परिस्थिति में आप ऐसा करते हो। आप देख लो कि आपकी अंतरात्मा क्या कहती है। ऐसा ना हो कि आपके पास पैसा-रुपया-सोने का झूला हो लेकिन आप घुटन में हो; जमीन पर भी सोए हो लेकिन आप अपने आप में हो — तब कोई मतलब नहीं। अभी जब तक मशीन काम कर रहा है तभी तक देख लेना; एक दिन मशीन काम करना बंद कर देगा, फिर वही घुटन में खाट पे जिओगे। अभी पश्चाताप का भी समय है, भरपाई का भी समय है, सत्कर्म भी कर सकते हो। बंदूक की गोली खत्म होने के बाद समर्पण का कोई मतलब नहीं — गोली है तब तक समर्पण कर दो। बाकी जीवन आपका है; जैसा करोगे वैसा पाओगे। मैं फैसला दे नहीं सकता — छोड़ना है कि पकड़ना है, वो आप देख लो।

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वीडियो: ज्ञान इंद्रियों में बल हैं तब तक ये काम कर लो ...! #yogiji_ka_satsang #aadhyatmik_satsang · 2025-07-06