प्रश्नोत्तर P13-0062 · भाग 13
साक्षी ध्यान भी इसी को बोलते हैं?
हां। साक्षी का मतलब — मैं देखने वाला हूं। मैं करने वाला हूं, उसका साक्षी भाव मैं स्वयं। करने वाला भी मैं हूं, देखने वाला भी मैं हूं, ध्यान लगाने वाला भी मैं हूं, कमी भी मेरी है — लेकिन मैं अपनी कमियों को निकाल रहा हूं; इसमें समर्पण का भाव होगा। जहां-जहां बंधन है, कैसे भी अपने आप को छुड़ा लो। ध्यान में बैठ गए — अगर गाने की आवाज आ रही है, तो मन अचेतन मन में नहीं, गाने में जाएगा; सुगंध आ रही है तो सुगंध में, स्वाद में, स्पर्श में अच्छा लग रहा है तो उसमें — मन एक ही है, दो नहीं। पांचों इंद्रियों को जब कुछ नहीं मिलेगा, तो मन हमेशा डायरेक्ट अचेतन मन में जाएगा, क्योंकि मन का काम है कुछ न कुछ करना, और यह तब तक करता रहेगा जब तक आपको अपने स्वयं तक पहुंचा नहीं देगा।
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वीडियो: ध्यान में ध्यान कैसे करें ? #योगी · 2026-07-03