प्रश्नोत्तर P12-0174 · भाग 12
गुरु जी, अपना दायित्व छोड़कर अध्यात्म के नाम पर 'कुछ नहीं करना' — क्या यह ईमानदारी से जीना है?
यही तो बात है, 'कुछ नहीं करना' आप लोग समझ नहीं पाते। कुछ नहीं करना मतलब बेईमानी नहीं करना। जीवन जीने के लिए, जितने लोग आपके पास हैं उनके लिए और अपने लिए, ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग तो अपनाना पड़ेगा ना। कुछ ना करके क्या रहा जा सकता है? करने का भाव, कर्तापन, मेरा का भाव मिटाना है। कुछ ना करना मतलब बहुत कुछ करना — छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड नहीं करना; राग-द्वेष, मोह-आसक्ति, इच्छा-अपेक्षा, मेरा और कर्ता का भाव नहीं करना। मैं आपको कुछ नहीं करने में आने को कह रहा हूं, तो क्या मैं कुछ नहीं कर रहा? लेकिन इस करने में कोई उम्मीद नहीं, कोई लालच नहीं; बस इतना कि मैं कितना कर दूं कि लोग उसका सदुपयोग कर पाएं, अपने आप को समझ पाएं। अपने विवेक का उपयोग करके देखो कि प्रयास कब करना पड़ा — जब आपने बेईमानी की; यह करना बंद करो।
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