प्रश्नोत्तर P12-0164 · भाग 12
(लाइव में) मुझमें एक बुराई है — कई बार मैं जानबूझकर बुरा सोचता हूं और सोचकर खुश हो रहा होता हूं। ये भाव भीतर अक्सर आता है, इस पर ज्यादा सोचूं तो डर लगने लगता है। शायद ये मेरे पिछले संस्कार हैं — इसे ठीक करना है।
कोई बात नहीं, सोच आने दो, प्रतिक्रिया मत देना। मानसिक का नहीं — शरीर से प्रतिक्रिया मत दो। अगर मानसिक के पीछे पड़ोगे तो आप बहुत ज्यादा डिस्टर्ब हो जाओगे, अपसेट हो जाओगे; मानसिक छोड़ दो। आप अपने शरीर के द्वारा क्या करते हो, वो मेन है — मानसिक के चक्कर में पड़ो ही मत, अपना काम शुद्धता से करो। पांच इंद्रियों के द्वारा बाहर किसी के साथ वैसा मत करो। और नहीं हो सके तो अपनों की कुटिया में आकर कुछ दिन रहो, समय दो।
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वीडियो: 15 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-08