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प्रश्नोत्तर P12-0143 · भाग 12

(एक साधक जो विपासना सेंटर भी जा चुके थे) गुरु जी, ध्यान को लगाया कैसे जाए, उसे कंटिन्यू कैसे रखा जाए? मैं दिमागी शांति के लिए ध्यान करना चाहता हूं।

दिमाग भी अशांत होता है क्या? दिमाग तो एक मशीन है; दिमाग के पीछे वाला अशांत है, और वो अपने कर्म से अशांत है। जो आप चाह रहे हो वो नहीं मिला, या जो करना चाह रहे हो वो नहीं कर पाए — तो अपनी योग्यता जांचो, सीधी सी बात है। या मेरी योग्यता नहीं है, या सामने वाले की; ऐसी जगह मांग मत करो, अपनी भी और सामने वाले की भी स्थिति-परिस्थिति देखो। अशांति का कारण है योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा। ताला जिस चाबी से बंद होगा उसी से खुलेगा — अशांति आपके कर्म से हुई है, तो ध्यान करने से शांति कैसे मिलेगी? आप गलत ट्रैक पर जा रहे हो, जो ढूंढ रहे हो वो वहां है ही नहीं। विचार कहां से आते हैं? जब आपको कुछ चाहिए — जितनी जानकारियां हैं, जहां राग-द्वेष है, वहीं विचार आते हैं। फोकस वहीं लगता है जो हमें चाहिए; जरूरत में फोकस अपने आप लग जाता है, आपको लगाने की जरूरत नहीं — भूख लगी है तो कहीं और फोकस नहीं लगा सकते, भोजन कर लो फिर लग जाएगा। आप जबरदस्ती कर रहे हो। ध्यान के लिए दो चाहिए — एक जिस पर ध्यान किया जाएगा और एक ध्यान करने वाला; एक में ध्यान नहीं होता। ध्यान ही दुख है, ध्यान ही सुख है — ध्यान वहां गया, आपके तरीके से हुआ तो सुख, नहीं हुआ तो दुख। तो ध्यान लगाने का काम मत करिए, राग-द्वेष से छुड़ाने का काम करिए; जहां-जहां ध्यान जा रहा है, देखिए क्यों जा रहा है। ध्यान आपसे है, आप ध्यान से नहीं, तो ध्यान करने की क्या जरूरत? ध्यान पैदा कहां से हुआ? 'चाहिए' में — जहां इच्छा आई, तुरंत ध्यान वहां गया। चाहिए को छोड़ दो, ध्यान से मुक्त हो गए। जब तक चाहिए, ध्यान जाएगा; अपने तरीके में रहोगे तो राग-द्वेष में लौटेगा, जरूरत में रहोगे तो ना राग ना द्वेष, संतोष में लौटेगा; और चाहिए से मुक्त हो गए तो ध्यान जाएगा ही नहीं। जब आप अपने आप में हो जाओगे तो ध्यान की जरूरत भी नहीं, क्योंकि एक ही है — तब परम ध्यान घटित होगा, उसे कहते हैं एकाकार। ध्यान करना नहीं है, ध्यान से मुक्त होना है, और वो तभी जब चाहिए से मुक्त होगे। तो जरूरत में जीना चालू करो — योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा, मान की इच्छा, बड़ाई की इच्छा, दिखावे की इच्छा का त्याग करो, फिर अशांति ढूंढोगे तो भी नहीं मिलेगी। जब तक योग्यता से ज्यादा चाहिए, अशांति ही रहेगी — मिलेगा तो संभाल नहीं पाओगे, नहीं मिलेगा तो द्वेष होगा। अगर ध्यान कहीं है, तो इसका मतलब मैं बाहर हूं, क्योंकि कुछ चाहिए।

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वीडियो: मुझे ध्यान समझ में नहीं आया ध्यान कैसे करूं ? #योगी · 2026-07-04